Thursday, 26 March 2015
Tuesday, 24 March 2015
श्री गणेश शंकर विदयार्थी जी को उनके बलिदान दिवस (25 मार्च) पर शत शत् नमन्.
निडर और निष्पक्ष पत्रकार समाज-सेवी, स्वतंत्रता सेनानी और कुशल राजनीतिज्ञ श्री गणेश शंकर विदयार्थी जी को उनके बलिदान दिवस (25 मार्च) पर शत शत् नमन्.
(ऐसे कई पत्रकार हैं, जिन्होंने अपनी कलम से सत्ता तक की राह बदल दी, गणेशशंकर विद्यार्थी भी ऐसे ही पत्रकार थे, जिन्होंने अपनी कलम की ताकत से अंग्रेज़ी शासन की नींव हिला दी थी)
Thursday, 19 March 2015
Wednesday, 18 March 2015
पाल में नया पत्रकार भवन बनाने का मार्ग प्रशस्त
पाल में नया पत्रकार भवन बनाने का मार्ग प्रशस्त
लीजनिरस्त होने से पत्रकारों नेपुराना भवन सरकार को सौंपा
आलोक सिंघई
भोपाल,18मार्च।राजधानी भोपाल के पत्रकारोंने सरकार को प्रदेश में स्वस्थसंवाद का नया मंच बनाने काअवसर प्रदान कर दिया है। इसफैसले में पत्रकारों ने मालवीयनगर स्थित पत्रकार भवन सरकारको सौंप दिया है ताकि वह इसभवन को गिराकर दस मंजिलासर्वसुविधा युक्त आधुनिक भवनबनाने का काम आरंभ कर सके। आजसाधारण सभा की बैठक में पत्रकारभवन समिति के सदस्य पत्रकारोंने विधिवत प्रस्ताव पारितकरके भवन का स्वामित्व सरकारको सौंपने का फैसला लिया है।प्रशासन की ओर से टीटीनगरएसडीएम ने भवन का कब्जा विधिवतप्राप्त कर लिया है। इसके साथही भवन पर अवैध कब्जे के खिलाफबरसों से चल रही पत्रकारोंकी मुहिम ने अपना सुखांत लक्ष्यपूरा कर लिया है। अब सरकार इसभवन को डाइनामाईट लगाकर गिराएगीऔर परिसर से समीप स्थित झुग्गियां,किचिन गार्डनके रूप में जुड़े मैदान औरपत्रकार भवन को मिलाकर लगभगतीन हजार वर्गमीटर क्षेत्रमें नए अत्याधुनिक भवन कानिर्माण करेगी।
भोपालके जिला दंडाधिकारी निशांतबरवड़े ने विगत 2फरवरी कोपारित प्रकरण क्रमांक 01।अ-20(4)।13-14 मेंपत्रकार भवन की लीज निरस्तकरने का आदेश दिया था जिसकेबाद भोपाल के पत्रकारों नेनवनिर्माण के लिए ये भवन सरकारको सौंपने का फैसला लिया है।पत्रकारों के पास अब तक केवल27007 वर्गफीटजमीन का पट्टा था जो नए भवन केसाथ बढ़कर लगभग चार गुना होजाएगा। कलेक्टर ने यह फैसलालीजधारक वर्किंग जर्नलिस्टयूनियन, भोपालकी ओर से शर्तों के उल्लंघनकिए जाने के बाद लिया है।अपनेनिर्णय में जिला दंडाधिकारीने कहा है कि वर्ष 1969में वर्किंगजर्नलिस्ट यूनियन भोपाल कोमालवीय नगर स्थित प्लाट नंबर01 शीटनंबर 21का27007 वर्गफीटभूमि का पट्टा सामाजिक औरसांस्कृतिक गतिविधियां संचालितकरने के उद्देश्य से प्रदानकिया गया था। संस्था ने इसभूखंड का उपयोग विवाह और अन्यगैर पत्रकारिता गतिविधियोंके लिए करना शुरु कर दिया। इसपट्टे की लीज वर्ष 1999में समाप्तहो चुकी थी जिसका नवीनीकरणभी नहीं कराया गया।
पत्रकारभवन को आपराधिक और व्यावसायिकगतिविधियों का अड्डा बनाएजाने की शिकायतें मिलने केबाद पत्रकार भवन समिति को मप्रभू राजस्व संहिता 1959की धारा 182के अंतर्गतकारण बताओ नोटिस दिया गया थाकि लीज शर्तों का उल्लंघन करनेके कारण क्यों ने भवन को राजसातकरके पुनः प्रवेश की कार्रवाईकी जाए। वर्किंग जर्नलिस्टयूनियन की ओर से अवधेश भार्गवने स्वीकार किया कि लीज डीडकी शर्तों का उल्लंघन तो कियाही जा रहा है साथ में भवन काउपयोग गैर पत्रकारिता गतिविधियोंके लिए भी किया जा रहा है।उन्होंने आयुक्त जनसंपर्कसंचालनालय को भी पत्र लिखकरआबंटित भूमि सरकार को लौटानेका अनुरोध किया। पत्रकार भवनसमिति भोपाल के अध्यक्ष एन.पी.अग्रवालने भी आयुक्त जनसंपर्क संचालनालयको को पत्र भेजकर बताया किसमिति ने 30.11.2014को हुई बैठकमें इस भूखंड पर समाचार पत्रोंऔर पत्रकारों के हित मेंबहुमंजिला इमारत बनाए जानेका निर्णय लिया है।
कलेक्टरके समक्ष सुनवाई के दौरान बादमें पंजीकृत कई संगठनों केप्रतिनिधियों ने आपत्ति भीदर्ज कराई जिसके जवाब मेंअनावेदक अवधेश भार्गव ने बतायाकि आपत्ति करने वाले लोग मप्रश्रमजीवी पत्रकार संघ के हैंजिसका पंजीयन वर्ष 1992में हुआ था।अन्य दावेदार इंडियन फेडरेशनआफ वर्किंग जर्नलिस्ट कापंजीयन भी वर्ष 1974में हुआ था।जाहिर है कि बाद में अस्तित्वमें आईं इन संस्थाओं का पत्रकारभवन से कोई लेना देना नहीं है।पत्रकार भवन पर अवैध कब्जाजमाने वालों का तर्क था कि लीजडीड में समयावधि नहीं लिखीहै इसलिए उसे तीस साल मेंनवीनीकरण कराए जाने की जरूरतनहीं है। इस पर जिला दंडाधिकारीने कहा कि वर्ष 2002तक जो लीजजमा कराई जा रही थी वह लीज डीडकी आम शर्तों के अनुसार थीजाहिर है कि पट्टे के आबंटनकी सामान्य प्रक्रिया इसप्रकरण में भी लागू होगी।
भूराजस्व संहिता की धारा 182(2)में साफलिखा है कि सरकारी पट्टेदारको उसकी भूमि से राजस्व अधिकारीके आदेश द्वारा निम्नलिखितआधारों में से किसी एक या अधिकआधारों पर बेदखल किया जा सकेगा।अर्थात-(एक)यह कि उसनेलगान का उस तारीख से जिनको किवह शोध्य हो गया था ,तीन मास कीकालावधि तक भुगतान नहीं कियागया है। या (दो)यह कि उसनेएसी भूमि का उपयोग उन प्रयोजनोंसे जिनके लिए वह प्रदान की गईथी, भिन्नप्रयोजनों के लिए किया है।या (तीन)यह कि उसकेपट्टे की अवधि का अवसान होचुका है या(चार)यह कि उसनेअनुदान की किसी निबंधन या शर्तका उल्लंघन किया है।
अपनेफैसले में जिला दंडाधिकारीने कहा है कि लीज धारक ने इनसभी शर्तों का उल्लंघन कियाहै इसलिए भूखंड पर पुनः प्रवेशका ही विकल्प शेष रह गया है।इसलिए पट्टा निरस्त करके भूखंडका आधिपत्य प्राप्त करने काआदेश दिया जाता है। इसके लिएराजधानी परियोजना टीटीनगरवृत्त भोपाल से उक्त भूखंडपर पुनः प्रवेश की कार्रवाईकरके आधिपत्य प्राप्त करें।आज पत्रकार भवन समिति ने साधारणसभा की बैठक में आधिपत्य सौंपनेकी कार्रवाई का विधिवत प्रस्तावतैयार करके एसडीएम को सौंपदिया है,ताकिनया भवन बनाया जा सके।
गौरतलबहै कि लगभग बीस सालों से सरकारीबजट को छिन्नभिन्न करने वालेसत्ता माफिया के गुर्गे इसपत्रकार भवन का उपयोग कर रहेथे। वे समय समय पर मुख्यमंत्रीऔर सरकार के मंत्रियों व सचिवोंको भी ब्लैकमेल करते थे और उनपर फिजूल खर्ची की योजनाओंके लिए बजट आबंटित करने कादबाव बनाते रहते थे। कांग्रेसकी पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंहसरकार ने इस सत्ता माफिया कोभरपूर प्रश्रय दिया था। इसकेबाद भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्रीउमा भारती ने इस माफिया तंत्रको भेदने का प्रयास भी कियालेकिन उनके हटते ही ये गिरोहफिर सक्रिय हो गया था। वर्तमानमुख्यमंत्री शिवराज सिंहचौहान के सामने जब ये समस्यालाई गई तो उन्होंने प्रशासनको संविधान सम्मत काम करनेके निर्देश दिये। प्रस्तुततथ्यों के प्रकाश में प्रशासनने पत्रकार भवन को दुबाराबनाने का फैसला लिया है। जिसकेबाद सत्ता माफिया के गढ़ बनचुके इस भवन को ढहाने की कार्रवाईका मार्ग प्रशस्त हुआ है।बरसों से प्रदेश और पत्रकारोंके हित में लड़ाई लड़ रहे कईजांबाज पत्रकारों ने इस संग्राममें अपनी आहुतियां दी हैं।प्रदेश और पत्रकारों के हितमें पहली बार किसी सरकार नेयह फैसला लिया है जिसका स्वागतराजधानी के अलावा प्रदेश भरके जमीनी पत्रकार कर रहे हैं।उम्मीद की जानी चाहिए कि शिवराजसिंह सरकार इस यशस्वी कार्यको बखूबी अंजाम देगी और नईपीढी़ के पत्रकारों के लिएनया भवन बनाकर एक गौरवमयीविरासत में शामिल होने का अवसरप्रदान करेगी।
भोपाल में नया पत्रकार भवन बनाने का मार्ग प्रशस्त लीज निरस्त होने से पत्रकारों ने पुराना भवन सरकार को सौंपा
भोपाल में नया पत्रकार भवन बनाने का मार्ग प्रशस्त
लीज निरस्त होने से पत्रकारों ने पुराना भवन सरकार को सौंपा
-आलोक सिंघई
भोपाल,18 मार्च 2015। राजधानी भोपाल के पत्रकारों ने सरकार को प्रदेश में स्वस्थ संवाद का नया मंच बनाने का अवसर प्रदान कर दिया है। इस फैसले में पत्रकारों ने मालवीय नगर स्थित पत्रकार भवन सरकार को सौंप दिया है ताकि वह इस भवन को गिराकर दस मंजिला सर्वसुविधा युक्त आधुनिक भवन बनाने का काम आरंभ कर सके। आज साधारण सभा की बैठक में पत्रकार भवन समिति के सदस्य पत्रकारों ने विधिवत प्रस्ताव पारित करके भवन का स्वामित्व सरकार को सौंपने का फैसला लिया है। प्रशासन की ओर से टीटीनगर एसडीएम ने भवन का कब्जा विधिवत प्राप्त कर लिया है। इसके साथ ही भवन पर अवैध कब्जे के खिलाफ बरसों से चल रही पत्रकारों की मुहिम ने अपना सुखांत लक्ष्य पूरा कर लिया है। अब सरकार इस भवन को डाइनामाईट लगाकर गिराएगी और परिसर से समीप स्थित झुग्गियां, किचिन गार्डन के रूप में जुड़े मैदान और पत्रकार भवन को मिलाकर लगभग तीन हजार वर्गमीटर क्षेत्र में नए अत्याधुनिक भवन का निर्माण करेगी।
भोपाल के जिला दंडाधिकारी निशांत बरवड़े ने विगत 2 फरवरी को पारित प्रकरण क्रमांक 01। अ-20(4)। 13-14 में पत्रकार भवन की लीज निरस्त करने का आदेश दिया था जिसके बाद भोपाल के पत्रकारों ने नवनिर्माण के लिए ये भवन सरकार को सौंपने का फैसला लिया है। पत्रकारों के पास अब तक केवल 27007 वर्गफीट जमीन का पट्टा था जो नए भवन के साथ बढक़र लगभग चार गुना हो जाएगा। कलेक्टर ने यह फैसला लीजधारक वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन, भोपाल की ओर से शर्तों के उल्लंघन किए जाने के बाद लिया है।अपने निर्णय में जिला दंडाधिकारी ने कहा है कि वर्ष 1969 में वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन भोपाल को मालवीय नगर स्थित प्लाट नंबर 01 शीट नंबर 21का 27007 वर्गफीट भूमि का पट्टा सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित करने के उद्देश्य से प्रदान किया गया था। संस्था ने इस भूखंड का उपयोग विवाह और अन्य गैर पत्रकारिता गतिविधियों के लिए करना शुरु कर दिया। इस पट्टे की लीज वर्ष 1999 में समाप्त हो चुकी थी जिसका नवीनीकरण भी नहीं कराया गया।
पत्रकार भवन को आपराधिक और व्यावसायिक गतिविधियों का अड्डा बनाए जाने की शिकायतें मिलने के बाद पत्रकार भवन समिति को मप्र भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 182 के अंतर्गत कारण बताओ नोटिस दिया गया था कि लीज शर्तों का उल्लंघन करने के कारण क्यों ने भवन को राजसात करके पुन: प्रवेश की कार्रवाई की जाए। वर्किंग जर्नलिस्ट यूनियन की ओर से अवधेश भार्गव ने स्वीकार किया कि लीज डीड की शर्तों का उल्लंघन तो किया ही जा रहा है साथ में भवन का उपयोग गैर पत्रकारिता गतिविधियों के लिए भी किया जा रहा है। उन्होंने आयुक्त जनसंपर्क संचालनालय को भी पत्र लिखकर आबंटित भूमि सरकार को लौटाने का अनुरोध किया। पत्रकार भवन समिति भोपाल के अध्यक्ष एन.पी. अग्रवाल ने भी आयुक्त जनसंपर्क संचालनालय को को पत्र भेजकर बताया कि समिति ने 30.11.2014 को हुई बैठक में इस भूखंड पर समाचार पत्रों और पत्रकारों के हित में बहुमंजिला इमारत बनाए जाने का निर्णय लिया है।
कलेक्टर के समक्ष सुनवाई के दौरान बाद में पंजीकृत कई संगठनों के प्रतिनिधियों ने आपत्ति भी दर्ज कराई जिसके जवाब में अनावेदक अवधेश भार्गव ने बताया कि आपत्ति करने वाले लोग मप्र श्रमजीवी पत्रकार संघ के हैं जिसका पंजीयन वर्ष 1992 में हुआ था। अन्य दावेदार इंडियन फेडरेशन आफ वर्किंग जर्नलिस्ट का पंजीयन भी वर्ष 1974 में हुआ था। जाहिर है कि बाद में अस्तित्व में आईं इन संस्थाओं का पत्रकार भवन से कोई लेना देना नहीं है। पत्रकार भवन पर अवैध कब्जा जमाने वालों का तर्क था कि लीज डीड में समयावधि नहीं लिखी है इसलिए उसे तीस साल में नवीनीकरण कराए जाने की जरूरत नहीं है। इस पर जिला दंडाधिकारी ने कहा कि वर्ष 2002 तक जो लीज जमा कराई जा रही थी वह लीज डीड की आम शर्तों के अनुसार थी जाहिर है कि पट्टे के आबंटन की सामान्य प्रक्रिया इस प्रकरण में भी लागू होगी।
भू राजस्व संहिता की धारा 182(2) में साफ लिखा है कि सरकारी पट्टेदार को उसकी भूमि से राजस्व अधिकारी के आदेश द्वारा निम्नलिखित आधारों में से किसी एक या अधिक आधारों पर बेदखल किया जा सकेगा। अर्थात-(एक) यह कि उसने लगान का उस तारीख से जिनको कि वह शोध्य हो गया था , तीन मास की कालावधि तक भुगतान नहीं किया गया है। या (दो) यह कि उसने एसी भूमि का उपयोग उन प्रयोजनों से जिनके लिए वह प्रदान की गई थी, भिन्न प्रयोजनों के लिए किया है। या (तीन) यह कि उसके पट्टे की अवधि का अवसान हो चुका है या(चार) यह कि उसने अनुदान की किसी निबंधन या शर्त का उल्लंघन किया है।
अपने फैसले में जिला दंडाधिकारी ने कहा है कि लीज धारक ने इन सभी शर्तों का उल्लंघन किया है इसलिए भूखंड पर पुन: प्रवेश का ही विकल्प शेष रह गया है। इसलिए पट्टा निरस्त करके भूखंड का आधिपत्य प्राप्त करने का आदेश दिया जाता है। इसके लिए राजधानी परियोजना टीटीनगर वृत्त भोपाल से उक्त भूखंड पर पुन: प्रवेश की कार्रवाई करके आधिपत्य प्राप्त करें। आज पत्रकार भवन समिति ने साधारण सभा की बैठक में आधिपत्य सौंपने की कार्रवाई का विधिवत प्रस्ताव तैयार करके एसडीएम को सौंप दिया है,ताकि नया भवन बनाया जा सके।
गौरतलब है कि लगभग बीस सालों से सरकारी बजट को छिन्नभिन्न करने वाले सत्ता माफिया के गुर्गे इस पत्रकार भवन का उपयोग कर रहे थे। वे समय समय पर मुख्यमंत्री और सरकार के मंत्रियों व सचिवों को भी ब्लैकमेल करते थे और उन पर फिजूल खर्ची की योजनाओं के लिए बजट आबंटित करने का दबाव बनाते रहते थे। कांग्रेस की पूर्ववर्ती दिग्विजय सिंह सरकार ने इस सत्ता माफिया को भरपूर प्रश्रय दिया था। इसके बाद भाजपा की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने इस माफिया तंत्र को भेदने का प्रयास भी किया लेकिन उनके हटते ही ये गिरोह फिर सक्रिय हो गया था। वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के सामने जब ये समस्या लाई गई तो उन्होंने प्रशासन को संविधान सम्मत काम करने के निर्देश दिये। प्रस्तुत तथ्यों के प्रकाश में प्रशासन ने पत्रकार भवन को दुबारा बनाने का फैसला लिया है। जिसके बाद सत्ता माफिया के गढ़ बन चुके इस भवन को ढहाने की कार्रवाई का मार्ग प्रशस्त हुआ है। बरसों से प्रदेश और पत्रकारों के हित में लड़ाई लड़ रहे कई जांबाज पत्रकारों ने इस संग्राम में अपनी आहुतियां दी हैं। प्रदेश और पत्रकारों के हित में पहली बार किसी सरकार ने यह फैसला लिया है जिसका स्वागत राजधानी के अलावा प्रदेश भर के जमीनी पत्रकार कर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि शिवराज सिंह सरकार इस यशस्वी कार्य को बखूबी अंजाम देगी और नई पीढी़ के पत्रकारों के लिए नया भवन बनाकर एक गौरवमयी विरासत में शामिल होने का अवसर प्रदान करेगी।
क जमाने में पत्रकारों में युवा तुर्क नेता कहे जाने वाले शलभ भदौरिया कब स्वार्थों की
एक जमाने में पत्रकारों में युवा तुर्क नेता कहे जाने वाले शलभ भदौरिया कब स्वार्थों की गिरफ्त में आ गये ,उन्हें खुद ही पता नहीं चला,
साहित्य में विशेष रुचि रखने वाला ब्यक्तित्व काफी संवेदनशील होता है,और शलभ भी अत्यन्त संवेदनशील ब्यक्ति का नाम था1 दोस्तों पर सब न्योछावर करने वाला ब्यक्ति आखिर स्वार्थ को सर्वोपरि मान दोस्तों में ही अलग थलग पड़ गया1
शायद कहीं निज स्वार्थ को मित्रों के मुकाबले ज्यादा अॉकने की भूल के कारण उसके जीवन के अभिन्न मित्रों में एक एक कर टूटने का सिलसिला जो शुरू हुआ तो चलता ही गया,
मुझे भी1976 से शलभ का अभिन्न मित्र होने का सौभाग्य प्राप्त था,मेरे जैसे कितने अभिन्न ,भिन्न हो गये,
शायद किसी किताब में यह पढ़कर कि जिन कंधो का सहारा लेकर शिखर पर पंहुचो ( सीढ़ी) उन्हें तोड़ दो,जिससे चुनौती देने वाला कोई न बचे,पर अमल करने के कारण दोस्त तो तितर बितर हुये ही,पर गर्त यात्रा की शुरुआत भी यहीं से हुयी,और शलभ का तिलिस्म टूटता चला गया,किन्तु आत्म ग्लानि से ग्रस्त हेने का बोझ,सबसे प्यारी चीज का हाथ से खिसकने का क्षोभ मन में इतना घर कर गया कि एक सुशिक्षत ब्यक्ति गुण्डे बदमाशों से घिर गया,
कल पत्रकार भवन समिति की वार्षिक बैठक पत्रकार भवन में होना है,किन्तु अपने गुण्डों से बैठक न होने देने देने की ठान चुके शलभ ने,हर ओछे हथकण्डे अपना लिये,
मैंने स्वयम् बात की कि ,पत्रकार भवन की लीज रद्द कर दी गई है,यह समिति की अंतिम बैठक है,कृपाकर शॉति से बैठक होने दें,किन्तु अपने अड़ियल रुख के कारण अपने हाथ से पत्रकार भवन के सरकने का गम शलभ को और अड़ियल बना गया,पत्रकार भवन के मोहपाश ने विगत तीन वर्षों से शलभ को विक्षिप्तता की स्थिति तक पंहुचा दिया है,वह अपनी सत्ता का ह्रास देखते देखते इतने डिप्रेशन में पंहुच चुके हैं,कि अपने पराये का फर्क भी भूल चुके हैं ,
खैर ,मैं यह सब इसलिये लिखा है,क्योकि हम पत्रकार विरादरी की संस्कृति को लड़ाई झगड़ा कर दूषित नहीं करना चाह रहे थे,इसलियै हमने बैठक का स्थान बदल दिया है,आप सब इससे अवगत हों इसलिये वस्तुस्थिति हमने आपके सामने रख दी है,
मेरी ईश्वर से ब्यक्तिगत प्रार्थना है,कि पत्रकार भवन मेंचलनै वाले बुलडोजर के कारण किसी की कमाई का जरिया छिनने का गम व दुकान बन्द होने की चिंता सहन करने की शक्ति उन लोगों को अवश्य दे,जो आज अवशादग्रस्त हो चुके हैं,,,जय हरि,,,
साहित्य में विशेष रुचि रखने वाला ब्यक्तित्व काफी संवेदनशील होता है,और शलभ भी अत्यन्त संवेदनशील ब्यक्ति का नाम था1 दोस्तों पर सब न्योछावर करने वाला ब्यक्ति आखिर स्वार्थ को सर्वोपरि मान दोस्तों में ही अलग थलग पड़ गया1
शायद कहीं निज स्वार्थ को मित्रों के मुकाबले ज्यादा अॉकने की भूल के कारण उसके जीवन के अभिन्न मित्रों में एक एक कर टूटने का सिलसिला जो शुरू हुआ तो चलता ही गया,
मुझे भी1976 से शलभ का अभिन्न मित्र होने का सौभाग्य प्राप्त था,मेरे जैसे कितने अभिन्न ,भिन्न हो गये,
शायद किसी किताब में यह पढ़कर कि जिन कंधो का सहारा लेकर शिखर पर पंहुचो ( सीढ़ी) उन्हें तोड़ दो,जिससे चुनौती देने वाला कोई न बचे,पर अमल करने के कारण दोस्त तो तितर बितर हुये ही,पर गर्त यात्रा की शुरुआत भी यहीं से हुयी,और शलभ का तिलिस्म टूटता चला गया,किन्तु आत्म ग्लानि से ग्रस्त हेने का बोझ,सबसे प्यारी चीज का हाथ से खिसकने का क्षोभ मन में इतना घर कर गया कि एक सुशिक्षत ब्यक्ति गुण्डे बदमाशों से घिर गया,
कल पत्रकार भवन समिति की वार्षिक बैठक पत्रकार भवन में होना है,किन्तु अपने गुण्डों से बैठक न होने देने देने की ठान चुके शलभ ने,हर ओछे हथकण्डे अपना लिये,
मैंने स्वयम् बात की कि ,पत्रकार भवन की लीज रद्द कर दी गई है,यह समिति की अंतिम बैठक है,कृपाकर शॉति से बैठक होने दें,किन्तु अपने अड़ियल रुख के कारण अपने हाथ से पत्रकार भवन के सरकने का गम शलभ को और अड़ियल बना गया,पत्रकार भवन के मोहपाश ने विगत तीन वर्षों से शलभ को विक्षिप्तता की स्थिति तक पंहुचा दिया है,वह अपनी सत्ता का ह्रास देखते देखते इतने डिप्रेशन में पंहुच चुके हैं,कि अपने पराये का फर्क भी भूल चुके हैं ,
खैर ,मैं यह सब इसलिये लिखा है,क्योकि हम पत्रकार विरादरी की संस्कृति को लड़ाई झगड़ा कर दूषित नहीं करना चाह रहे थे,इसलियै हमने बैठक का स्थान बदल दिया है,आप सब इससे अवगत हों इसलिये वस्तुस्थिति हमने आपके सामने रख दी है,
मेरी ईश्वर से ब्यक्तिगत प्रार्थना है,कि पत्रकार भवन मेंचलनै वाले बुलडोजर के कारण किसी की कमाई का जरिया छिनने का गम व दुकान बन्द होने की चिंता सहन करने की शक्ति उन लोगों को अवश्य दे,जो आज अवशादग्रस्त हो चुके हैं,,,जय हरि,,,
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